Pujya Bapu Shri Mahant Churamani Saheb

पूज्य बापू श्री महंत चुरामणि साहेब जी द्वारा सद्गुरु कबीर साहेब जी के संदेश को जन-जन तक पहुँचाना

पूज्य बापू श्री महंत चुरामणि साहेब जी द्वारा सद्गुरु कबीर साहेब जी के संदेश को जन-जन तक पहुँचाना बापू जी का एक महत्वपूर्ण मिशन है। उनका दृढ़ विश्वास है कि सद्गुरु कबीर साहेब जी के उपदेश और शिक्षाएं समस्त मानवता के लिए मार्गदर्शन प्रदान करती हैं। बापू जी ने इसे जन-जन तक पहुँचाने का निर्णय लिया और इसके लिए कई माध्यमों का उपयोग किया। उनकी पहल से विभिन्न कार्यक्रम, सेमिनार, संवाद और सत्संग का आयोजन किया जाता है, जहां लोगों को कबीर साहेब जी की शिक्षाओं के बारे में बताया जाता है।

बापू जी स्वयं भी नियमित रूप से समाज के विभिन्न वर्गों के साथ जुड़ते हैं और उनके माध्यम से कबीर साहेब जी के संदेशों को साझा करते हैं। उन्होंने कबीर साहेब जी की वाणी को संकलित किया और उसे पुस्तकों, पत्रिकाओं और वेबसाइटों के माध्यम से प्रचारित किया। बापू जी की समझ के अनुसार, कबीर साहेब जी के संदेश का लक्ष्य है समाज को जागरूक करना, नैतिकता की शिक्षा देना, और मानवता की सेवा में संलग्न करना।

बापू जी के नेतृत्व में चलने वाले विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में कबीर साहेब जी के संदेशों का विशेष रूप से प्रचार होता है। उन्होंने विभिन्न राज्यों में “कबीर सप्ताह” और “कबीर मेला” जैसे आयोजनों का आयोजन किया, जिसमें लाखों लोग भाग लेते हैं और कबीर साहेब जी की वाणी को सुनने, समझने और अपनाने का अवसर मिलता है। बापू जी ने न केवल कबीर साहेब जी की शिक्षाओं को प्रचारित किया है बल्कि उनके सिद्धांतों के आधार पर सामाजिक परिवर्तन की दिशा में भी कार्य किया है।

बापू जी का मानना है कि कबीर साहेब जी के संदेश में समाहित शिक्षा ही समाज को एक नए मार्ग पर ले जा सकती है। उन्होंने कबीर साहेब जी की शिक्षाओं को विभिन्न भाषाओं में अनुवादित किया ताकि इसे अधिक से अधिक लोग समझ सकें। बापू जी के प्रयासों से कबीर साहेब जी के संदेशों का प्रसार अब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी हो रहा है। उनकी इस तपस्या का मुख्य उद्देश्य है समाज को एकता, प्रेम, सहिष्णुता और सेवा के रास्ते पर ले जाना, जिससे कि कबीर साहेब जी की वाणी के अनुसार समाज में सद्भावना और समृद्धि स्थापित हो सके।

पूज्य बापू श्री महंत चुरामणि साहेब जी का जीवन ही एक उदाहरण है कि कैसे कबीर साहेब जी के संदेश को जन-जन तक पहुँचाया जा सकता है, जिससे समाज में परिवर्तन और सुधार संभव होता है। उनकी इस प्रेरणा से प्रेरित होकर कई अन्य लोग भी कबीर साहेब जी के संदेशों को जन-जन तक पहुँचाने के कार्य में जुटे हैं।